Ramana Maharshi ke Anmol Vachan

Ramana Maharshi ke Anmol Vachan

Author : Edited by Arthur Osborne

In stock
Rs. 150
Classification Self help
Pub Date December 2018
Imprint Manjul
Page Extent 180 pages
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 978-93-88241-28-1
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Rs. 150
(inclusive all taxes)
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about book

श्री रमण महृषि को सबसे महत्वपूर्ण संतों में से एक माना जाता है I उन्हें सोलह वर्ष की आयु में आध्यात्मिक जागरण का अनुभव मिला और वे अरुणाचल के पवित्र पर्वत पर आ गए, जहाँ उनके आसपास एक समुदाय पनपने लगा I वहीं से, उन्होंने अनेक प्रभावी लेखकों, कलाकारों व साधकों के ह्रदय को छुआ जैसे कार्ल युंग, हेनरी कार्टियर-ब्रेसौं और समरसेट मॉम I आज दुनिया में लाखों की संख्या में लोग उनकी शिक्षाओं से प्रभावित हो रहे हैं I
इस पुस्तक का संपादन उनके शिष्य आर्थर ऑस्बोर्न ने किया है I उन्हने संपदा, स्वतंत्रता, ज्ञान तथा हमारे सच्चे स्वभाव के सार जैसे विषयों पर महर्षि रमण के विचारों को प्रस्तुत करते हुए, यहीं और वर्तमान जीवन जीने के विषय में जानकारी दी है I
आत्म-निरीक्षण मुक्ति का मार्ग है, तथा श्री रमण श्री रमण महर्षि हमें आमंत्रित करते हैं कि हम अपने मोह और माया से अनासक्त हो कर, उस पथ पर चल सकें जो हमें ज्ञान कि और ले जाता है I
'भारत के अंतिम आध्यात्मिक महामानवों में से एक'
- पॉल ब्रन्टन
'वास्तविक परसन्नता कि खोज को प्रकाशित करती पुस्तक'
- एकहार्ट टॉल
'महर्षि की शिक्षाओं की व्याख्या आत्मीय और वस्तुनिष्ठ है'
- टाइम्स लिटरेरी सप्लीमेंट

About author

आर्थर ऑस्बोर्न (1906 -1970) आध्यात्मिकता और रहस्यवाद पर लिखने वाले एक प्रसिद्द अंग्रेजी लेखक थे, वे रमण महर्षि के शिष्य थे और उनसे ही प्रभावित हो कर उन्होंने उनकी जीवनी भी लिखी ।
ऑस्बोर्न ने ऑक्सफोर्ड के क्राइस्ट चर्च में दो साल तक इतिहास का अध्ययन किया, लेकिन अकादमिक संस्कृति से असंतुष्ट होकर उन्होनें विश्वविद्यालय छोड़ दिया। 1936 में वे आध्यात्मिक खोज पर निकले, जो अंततः उन्हें 1942 में रमण महर्षि तक ले आई I 1964 से, ऑस्बोर्न ने रमण महर्षि के भक्तों द्वारा स्थापित आश्रम रमणासरामम से प्रकाशित एक पत्रिका 'माउंटेन पाथ' के संस्थापक संपादक के रूप में कार्य किया । 8 मई 1970 को बैंगलोर में 63 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई।