Hawa Jaldi Main Hai

Hawa Jaldi Main Hai

Author : Tariq Qamar

In stock
Rs. 250
Classification Poetry
Pub Date June 2019
Imprint Manjul
Page Extent 186
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 978-93-88241-98-4
In stock
Rs. 250
(inclusive all taxes)
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about book

मेरे तो दर्द भी औरों के काम आते हैं
में रो पडूँ तो कई लोग मुस्कुराते हैं

कागज़ की एक नाव अगर पार हो गई
इसमें समन्दरों की कहाँ हार हो गई

इन चाहतों का कोई नतीजा नहीं तो क्या
हम तो उसी के हैं वो हमारा नहीं तो क्या

ख़ुद पे इस और क़यामत नहीं होगी हम से
दूसरी बार मोहब्बत नहीं होगी हम से

तारिक़ क़मर जैसा शायर ग़ज़ल को मुकद्दर से ही मिलता है, जब-जब इनको सुनता या पढता हूँ तो एक नई तरह की ताज़गी का अहसास होता है। शे'र कहना आसान है, लेकिन अपना शे'र अपने अन्दाज़ से कहना मुश्किल है और तारिक़ क़मर इस मुश्किल को आसान करने का हुनर जानते हैं। ज़िन्दगी और शायरी के रिश्ते को ऐतबार अता करती हुई ये आवाज़ हमारी शायरी की एक ऐसी आवाज़ है, जो नए ख़त-ओ-खाल के साथ अपनी इंफरादियत का अहसास कराती है। तारिक़ क़मर की शायरी को आने वाला वक़्त भी फ़रामोश नहीं कर सकेगा।
-जावेद अख़्तर

तारिक़ क़मर हमारी नई शायरी का आठवां सुर हैं और उन महफ़िलों में भी बहुत संजीदगी से सुने जाते हैं जो ग़ैर संजीदा होती जा रही हैं। वो आला तालीम के साथ-साथ एहसास ओ अफ़कार की इस दौलत से भी माला-माल हैं, जिसका तक़ाज़ा हमारी संजीदा शायर से करती हैं
-रहत इंदौरी

About author

डॉ. तारिक़ क़मर का जन्म जिगर मुरादाबादी के इलाके के क़स्बे सम्भल में मरहूम अक़ील अहमद साहब के यहाँ 01 जुलाई 1974 को हुआ। तारिक़ साहब को शाइरी का फ़न विरासत में मिला ,इनके वालिद और इनके दादा भी शाइर थे। तारिक़ कमर की शुरूआती पढाई संभल में हुई , फिर इन्होने मुख्तलिफ़ - मुख्तलिफ़ जगहसे अपनी तालीम पूरी की जैसे कानपुर ,मुरादाबाद और मुस्लिम यूनिवर्सिटी ,अलीगढ़।

लफ़्ज़ों को शाइरी में बरतने के मामले में तारिक़ फ़िज़ूल ख़र्ची नहीं करते पर पढाई के मामले में तारिक़ रती-भर भी कंजूस नज़र नहीं आते। तारिक़ क़मर इस छोटी सी उम्र में उर्दू, अंग्रेज़ी और पत्रकारिता एंड मॉस कम्युनिकेशन में स्नात्तकोतर है। "नई ग़ज़ल में इमेज़री " पे तारिक़ ने रूहेलखंड विश्वविद्यालय ,बरेली से शोध कर पी. एच .डी की।