Gubare Si Halki Hai Zindagi

Gubare Si Halki Hai Zindagi

Author : Praveen Kumar Gangrade

In stock
Rs. 195
Classification Self Help
Pub Date December 2017
Imprint Manjul
Page Extent 192 pages
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 978-81-8322-647-9
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Rs. 195
(inclusive all taxes)
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about book

सृष्टि के कुछ मूलभूत नियम हैं I अस्तित्व की सम्पूर्ण व्यवस्था तथा उसके एक भाग के रूप में हमारा जीवन भी इन्ही नियमों से संचालित होता है तथा सृष्टि के ये नियम हम सब पर समान रूप से लागू होते हैं I सृष्टि उसमें कोई भेद नहीं करती है I हमें ज्ञात हो या ना हो, ये नियम हम पर सदा लागू होते हैं I नियमों को समझे बिना यदि हम जीवन जीते हैं तो हम भ्रम में रहते हैं, और भ्रमित मानव अनुमान लगाकर या लोगों को देखकर जीते हैं I वे अपने जीवन की छोटी-छोटी चीज़ों के लिए भी बाहरी परिस्तिथियों, भाग्य, दूसरों के आशीर्वाद एवं चमत्कारों पर निर्भर रहते हैं, और इस कारण वे अस्थिर, अनिश्चित एवं दूसरों द्वारा नियंत्रित होते हैं I ऐसे लोग अनजाने में या संयोग से नियमों का पालन होने पर सुखी होते हैं अन्यथा दुःखी ही रहते हैं I इसलिए निरंतर सुखी रहने के लिए अपना जीवन स्वयत्ततापूर्ण जीते हुए सृष्टि के इन नियमों को जानना और उसके अनुसार जीवन जीना आवश्यक है I

About author

प्रवीण कुमार गंगराड़े की शिक्षा-दीक्षा एवं कार्यदायित्व बहुआयामी रहे हैं I उन्होंने विज्ञान में ग्रेजुएट, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेली कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग डिप्लोमा, इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट, स्वास्थ्य एवं पोषण में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है I उन्होंने इतिहास, लोक प्रशासन और मानव विज्ञान विषय लेकर म.प्र. लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की और शासकीय सेवा में आए, तत्पश्चात अपनी जीविकोपार्जन की शुरुआत एक निजी कंपनी में टेस्टिंग इंजीनियर के रूप में की I फिर सहायक जेलर के रूप में सेंट्रल जेल, इंदौर और महिला एवं बाल विकास विभाग में विभिन्न शासकीय दायित्वों का निर्वहन किया I वर्त्तमान में म.प्र.शासन के आनंद विभाग के तहत गठित राज्य आनंद संस्थान में निर्देशक के पद पर कार्यरत हैं I