Har Bhartiya Ke Liye Nivesh Ke Saral Upaya (Hindi) by Vinod Pottayil

Har Bhartiya Ke Liye Nivesh Ke Saral Upaya (Hindi) by Vinod Pottayil

Author : Vinod Pottayil

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Classification Finance
Pub Date 25 November 2018
Imprint Manjul
Page Extent 320 pages
Binding Perfect Paperback
Language Hindi
ISBN 978-93-88241-16-8
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about book

निवेश सम्बंधी अपने सभी प्रश्नोंके जवाब पाएं!
• मैं सुनार के पास बार - बार जाए बिना सोने मैं निवेश कैसे कर सकता हूँ ?म्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं, जिनमें मैं निवेश कर सकता हूँ?
• मुझे जीवन बीमा को ख़र्च मानना चाहिए या निवेश?
• शेयर बाज़ार कैसे काम करता है?
• क्या मैं 15 साल बाद भी पीपीएफ़ में निवेश कर सकता हूँ ?
• क्या एम्पलॉई प्रॉविडेंट स्कीम से पैसा निकालते समय करमुक्त होता है?
• रियल एस्टेट में निवेश करके मुनाफ़ा कमाने के कौन से तरीक़े हैं?
• क्या मुझे स्वास्थ्य बीमे की सचमुच ज़रुरत है? अगर हाँ, तो मेरे पास कितनी राशि का बीमा होना चाहिए?
• कैशलेस हेल्थ इनश्योरेंस क्या होता है? स्वास्थ्य बीमे में टॉप अप और सुपर टॉप अप का क्या मतलब होता है?
• वसीयत क्या है और क्या मुझे भी वसीयत लिखनी चाहिए?
• मैं संख्याओं और हिसाब-किताब में माहिर नहीं हूँ? क्या कोई आसान तरीक़ा है, जिससे मैं अपने निवेशों के भावी मूल्य का पता लगा सकता हूँ?

यह पुस्तक बताती है कि बाज़ार मैं उपलब्ध निवेश के सबसे लोकप्रिय विकल्प कैसे काम करते हैं. अप जो ज्ञान हासिल करेंगे, उससे न सिर्फ अप अपने निवेशों का बेहतर प्रबंधन कर पाएँगे, बल्कि इससे आपको स्वयं ही निवेश के संसार कि पड़ताल करने का आत्मविश्वास भी मिलेगा. यह पुस्तक सभी उम्र के लोगों के लिए एक उपयोगी साधन होगी, जो अपने वित्तीय जीवन की बागडोर अपने हाथों मैं थामना चाहते हैं.

About author

विनोद पोटटाईल के पास प्रकाशन और सॉफ्टवेयर उद्योगों में 20 वर्ष से ज़्यादा का अनुभव है. अपने लंबे कार्यकाल में वे बहुत से ऑफलाइन और ऑनलाइन प्रोजेक्टों में शामिल रहे हैं, जिनमें उपभोक्ता व्यवहार, उपभोक्ता की सीखने की वरीयताएँ और डिज़ाइन मेथडोलॉजी की समझ की आवश्यकता होती है. उन्होंने सौभाग्य ऐड्वर्टाइज़िंग, इंडियन एक्सप्रेस, आप्टेक, आईएलएंडएफ़एस, नेटकोर सॉल्यूशंस और नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ़ सिक्युरिटीज़ मार्केट्स जैसे संगठनों के साथ काम किया है और परामर्श दिया है.
विनोद उन विचारों और प्रयासों को लेकर जोशीले हैं, जो आम भारतवासी के जीवन पर सकारात्मक फ़र्क़ डाल सकें, जिनकी चिंताएँ और आशाएँ खुद उनसे मेल खाती हैं. वे प्रखरता से मोबाइल प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय रूपरेखा और शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले विकास पर पैनी नज़र रखते हैं, क्योंकि उन्हें महसूस होता है कि उनमें समाज पर सबसे ज़्यादा फ़र्क़ डालने कि क्षमता है. मूलतः केरल के विनोद ख़ुद को असली मुंबईकर मानते हैं और अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं.