Vikas Niyam

Vikas Niyam

Author : Sirshree

In stock
Rs. 100
Classification Self Help
Pub Date 2015
Imprint Manjul Hindi
Page Extent 176 pages
Binding Paperback
ISBN 978-81-8322-569-4
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Rs. 100
(inclusive all taxes)
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about book

विकास नियम
आत्मविकास द्वारा संतुष्टि पाने का राज़

बनाएँ विकास नियम को अपना आदर्श
विकास नियम हमारे चारों ओर काम कर रहा है I फिर चाहे वह शरीर का विकास हो, बुद्धि का विकास हो, शहर या देश एक विकास हो I यह नियम तो एक बुनियादी नियम है; यह पूर्णता की चाहत है I आइए, इस पुस्तक द्वारा विकास नियम को अपना आदर्श बना लें और विकास की नई ऊँचाइयों को छू लें I

विकास नियम हर इंसान और वस्तु में छिपी संभावनाओं को प्रकट करने का नियम है I यह आपकी संपूर्ण संतुष्टि की चाहत को पूरा करता है I इस नियम के ज़रिए आप जान सकते हैं कि :

• विकास नियम का महामंत्र क्या है
• विकास कि शुरुआत कैसे और कहाँ से करें
• विकास का विकल्प कैसे चुनें
• विकास पर सदा अपनी नज़र कैसे टिकाए रखें
• आत्मविकास के स्वामी कैसे बनें
• इंसान की अंतिम विकास अवस्था क्या है
• स्वयं को और अपने मन की बनाई गई सोच को कैसे जानें

विकास नियम के पन्नों में ऐसी हे कई बातों के सरल जवाब छिपे हैं, इन्हें पढ़ना शुरू करें - आज से, अभी से ...

About author

सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था I इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया I इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया I उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया I जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लम्बी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी, जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ I सरश्री ने दो हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सत्तर से अधिक पुस्तकों की रचना की है, जिन्हें दस से अधिक भाषाओँ में अनुवादित किया जा चुका है I