Karna Sangini: Ek Parityakt ki Rani

Karna Sangini: Ek Parityakt ki Rani

Author : Kavita Kane

In stock
Rs. 299
Classification Fiction
Pub Date Jan 2020
Imprint Manjul
Page Extent 356
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789389647150
In stock
Rs. 299
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about book

कुंती व सूर्य देव के संसर्ग से कर्ण का जन्म हुआ, जिसे उसकी माँ ने जन्म लेते ही त्याग दिया। वह राजकुमारों जैसे भाग्य का अधिकारी था परंतु उसे एक पिछड़ी जाति के सूत ने गोद लिया और वह उनमें से एक बना।
एक क्षत्रिय राजकुमारी उरुवी ने उसे अपने स्वयंवर में अर्जुन के स्थान पर चुना और यह एक बड़े सामाजिक विरोधाभास का विवाह था। उरुवी को कर्ण के परिवार की स्वीकृति पाने के लिए उसके प्रति अपने प्रेम और असीम बुद्धिमत्ता को प्रकट करना पड़ा। अंततः वह कर्ण की सहयोगी, परामर्शदाता और मार्गदर्शक बनी। हालाँकि, दुर्योधन के प्रति अंधनिष्ठा के कारण कर्ण का पतन हुआ, जिसे बदल पाना उरुवी के वश में नहीं था।
इस पुस्तक को उरुवी के दृष्टिकोण से लिखा गया है, और यह पांडवों व कौरवों के बीच हुए संघर्ष की पृष्ठभूमि की अनेक परतों को खोलती है। यह सभी विरोधों से परे, प्रेम की विजय की एक काव्यात्मक व मौलिक गाथा है।

'पुराकथा और समकालीन किस्सागोई का एक शानदार मेल'
- आश्विन सांघी

'यदि आपको पौराणिक कथाओं से लगाव है, तो यह पुस्तक अवश्य पढ़ें। आपको बहुत पसंद आएगी'
- अमीश त्रिपाठी

About author

कविता काणे का जन्म मुंबई में तथा पालन-पोषण पटना व दिल्ली में हुआ परंतु इसके बावजूद वे स्वयं को सही मायनों में पुणे की निवासी मानती हैं। अनेक वर्षों से पुणे में ही पढ़ाई और प्रवास के दौरान, उन्हें वह शहर ही अपना लगने लगा है, जहाँ अब वे अपने मरीनर पति प्रकाश, दो पुत्रियों किमाया और अमीया, एक दोस्ताना स्वभाव वाले श्वान डूड और बेब नाम की बिल्ली के साथ रहती हैं।
कविता अंग्रेजी साहित्य व मास कम्युनिकेशन में डिग्री के साथ एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वे सिनेमा और थियेटर में गहरी रुचि रखती हैं। परंतु उनका मानना है कि लेखन ही उनका एकमात्र कौशल है। यह उनका पहला उपन्यास है।