Currency Colony (Hindi)

Currency Colony (Hindi)

Author : Natarajan Elangovan (Author) Rajesh Kumar (Translator)

In stock
Rs. 199.00
Classification Slef-Help
Pub Date 25th February 2024
Imprint Sarvatra (An Imprint of Manjul Publishing House)
Page Extent 128
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355435064
In stock
Rs. 199.00
(inclusive all taxes)
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About the Book

‘करेंसी कॉलोनी’ नामक यह किताब कुछ भारतीय उद्यमियों की सफल-यात्रा के दौरान पेश आए खास पड़ावों के विश्लेषण एवं उनकी कारोबरी बुद्धिमत्ता से जुड़ी कहानियों का संकलन है। लेखक ने आज के कुछ सफल एवं मशहूर उद्यमियों की यात्रा के दौरान पेश आई मुश्किलों और घटनाओं की मदद से उद्यम-प्रवृति एवं उद्यमिता की प्रक्रिया को कुछ इस तरह से ‘डिकोड’ किया है कि यह किताब, अपना उद्यम शुरू करने के इच्छुक लोगों एवं आम पाठकों को व्यावहारिक समझ देने के मामले में अत्यंत उपयोगी बन गई है।

पुस्तक में जिन उद्यमियों की उद्यम-यात्राओं का विवरण है, उनमें शामिल हैं : सुनील भारती मित्तल, किशोर बियानी, डॉ. कल्लम अंजी रेड्डी, अनु आगा, संजय लालभाई, राघव बहल, जसवंतीबेन जमनादास पोपट और वालचंद हीराचंद दोशी।

About the Author(s)

नटराजन इलंगोवन को पत्रकारिता की दुनिया हमेशा ही लुभाती रही थी, लेकिन पारीवारिक मजबूरियां ऐसी थीं कि उन्हें सेल्सपर्सन का पेशा अपनाना पड़ा। कुछ समय बाद उन्हें अहसास हुआ कि दिन में सेल्स का रोजगार, दिन ढले पत्रकारिता की यह दोहरी भूमिका और दूसरे लोगों की इच्छाएं-आकांक्षाएं पूरी करते जाने का उनका जज्बा, उन्हें अपने सपनों को हकीकत में बदलने की मोहलत नहीं देगा।
सपना तो बचपन से ही उद्यमी होने का था और पत्रकारिता का आकर्षण तो था ही। धीरे-धीरे वह स्पष्ट तौर पर इस नतीजे पर पहुंच गये कि दोनों ही क्षेत्रों में कामयाबी के लिये उन्हें पहल खुद ही लेनी होगी। उनकी स्पष्ट धारणा थी कि ‘आप अपनी पूरी क्षमता से एक ही कंपनी में काम कर सकते हैं, लेकिन अत्यंत प्रभावी तरीके से आप कितनी कंपनियां चला सकते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है।’ अमूमन लोग एक व्यापार, एक उद्योग शुरु करते हैं, उसमें कामयाबी हासिल करते हैं और फिर अगले कारोबार की ओर बढ जाते हैं। लेकिन इलंगोवन ने शुरुआत भी अलग तरह से करने का निश्चय किया। वह न तो अपने सपने को इंतजार की घड़ियां गिनते देख सकते थे, न अपनी चाहत को, लिहाजा उन्होंने दोनों एक साथ शुरु किया और कुछ ही समय में उन्होंने एक कंपनी भी स्थापित कर ली और एक मीडिया हाउस भी।
लेकिन वह केवल अपनी निजी कामयाबी से संतुष्ट नहीं थे। वह चाहते थे कि देश में उद्यमियों की एक भरी-पूरी जमात हो। उनका मत है कि कोई भी देश अपने उद्यमियों की ही बदौलत प्रगति के अगले सोपान पर पहुंच सकता है। ‘करेन्सी कॉलोनी’ इसी आकांक्षा से पैदा हुयी। इस पुस्तक का केवल और केवल एक उद्देश्य है कि भारत के युवा, उर्वर दिमाग निडर होकर उद्योग-व्यवसाय करने के लिये प्ररित हों।

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