GHAZAL JAAG RAHI HAI

GHAZAL JAAG RAHI HAI

Author : Madan Mohan Upadhyay

In stock
Rs. 325
Classification Poetry
Pub Date November 2021
Imprint Sarvatra
Page Extent 254
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355430212
In stock
Rs. 325
(inclusive all taxes)
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About the Book

ग़ज़ल के साथ या ज़िन्दगी के साथ जो भी गुफ़्तगु हुई
वो ग़ज़ल की शक्ल में ढल गई। ‘ग़ज़ल जाग रही है’ ऐसी ही
ग़ुफ्तगु का सफ़र है जिसमें हर बार एक नया ही जीने का ऩजरिया
बन पड़ा है। हर बार नई बात या नई सोच से पुराने
एहसासों को पिरोया गया है।

About the Author(s)

मदन मोहन उपाध्याय का जन्म दिल्ली में हुआ और उन्होंने सेंट स्टी़फेंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.एससी. करने के पश्चात बैचलर ऑफ़ लॉ एवं एम.बी.ए. की उपाधि प्राप्त की। आपके दो ग़ज़ल संग्रह ‘एक चाँदनी एक समंदर एक साहिल’ और ‘एहसास की पाती’ के अलावा कविता संग्रह ‘खुशियों के रंग’ प्रकाशित हो चुके हैं। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1981 बैच से संबद्ध हैं और अपर मुख्य सचिव (मध्य प्रदेश शासन) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। आप ‘साहिल’ तखल्लुस से ग़ज़ल लिखते हैं।

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