Qutub Minar: Badlo main chipa sir

Qutub Minar: Badlo main chipa sir

Author : Narayani Gupta (author) Nirupa Joshi (translator)

In stock
Rs. 150
Classification Childrens Book
Pub Date March 2021
Imprint Manjul
Page Extent 32
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789389647501
In stock
Rs. 150
(inclusive all taxes)
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About the Book

इस दुनिया में बर्फ़ से ढँके पहाड़ हैं, नदियों में बहता साफ-चमचमाता पानी है। कितने ही लोग, जीव-जन्तु पक्षी, पेड़ यहाँ बसते हैं। पलते-बढ़ते हैं। इसके अलावा यहाँ हमारे पूर्वजों द्वारा निर्मित ऐसे स्मारक भी हैं, जो सैकड़ों सालों से अविचल खड़े हैं - हमारी ज़िन्दगियों और इतिहास को और मूल्यवान और समृद्ध बनाते हुए।
इन बेशकीमती स्मारकों और प्राकृतिक लैण्डस्केपों को संरक्षित रखना बेहद ज़रूरी है। इनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सरकारें और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) जैसी संस्थाएँ साथ काम कर रही हैं।
यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल दुनियाभर में फैले हैं। ये मनुष्य अथवा प्रकृति द्वारा निर्मित लैण्डस्केप और वास्तुकला के अद्भुत नमूने हैं। 2018 तक भारत में ऐसे 37 स्थलों को चिन्हित किया जा चुका है। इनका रख-रखाव और संरक्षण हमारी ज़िम्मेदारी है।
विश्व धरोहर के रूप में चिन्हित सभी स्थलों पर बच्चों के लिए एक पुस्तक श्रंखला का प्रकाशन किया जा रहा है।

About the Author(s)

नारायणी गुप्ता की बचपन की कई ख़ुशनुमा यादें हैं - दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों में पिकनिक मनाने की यादें। इनमें सबसे खास है कुतुब मीनार पर चढ़कर नीचे साफ़ हवा में दूर-दूर तक फैले चमकते लैण्डस्केप को देखना। नारायणी और उनके छात्र अक़्सर बातें करते हैं कि कैसे पुरानी इमारतें और लैण्डस्केप हमें अपने बीते हुए वक़्त को समझने में मदद करते हैं। नारायणी धरोहर यात्रा के आयोजकों का भी एक हिस्सा रही हैं। इन इमारतों के संरक्षण के लिए इन्होंने चौकीदार की भूमिका अदा की है। इनका मानना है कि लोगों को अपने मोबाइल अपनी जेब के हवाले कर देने चाहिए अन्यथा वे कितना कुछ देखने से महरूम रह जाते हैं। जैसे पुरानी र्इंटों पर गिरती धूप या फिर दूर दिखता किसी इमारत का गुम्बद।

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