Matilda ( Hindi)

Matilda ( Hindi)

Author : Roald Dahl (Author) Mrinalini Pandey (Translator)

In stock
Rs. 350.00
Classification Fiction Stories
Pub Date 25 September 2023
Imprint Manjul Publishing House
Page Extent 246
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355434227
In stock
Rs. 350.00
(inclusive all taxes)
OR
About the Book

सर्वकालिक बाल साहित्य में एक अत्यंत प्रसिद्ध कहानी, मटिल्डा पाठकों का परिचय कहानी की मुख्य नायिका मटिल्डा वर्मवुड की दुनिया से करवाती है। विशेष योग्यताओं एवं अपनी उम्र के अन्य बच्चों की तुलना में अधिक बुद्धिमान होने के बाद भी, उसे प्रताड़ित करने वाले माता-पिता द्वारा सदैव उपेक्षित होना पड़ता है, जो उसके शैक्षणिक कार्यों में लिप्त रहने के कारण उसका अपमान करते थे। भशक्तियों का, जिनके कारण वह सभी को संभालने में सक्षम रहती है। बच्चों सी सरलता और जादू की इस हास्यप्रद कहानी में क्या मटिल्डा परिस्थितियों से लड़ने में सफल रहेगी?
आलोचकों और पाठकों द्वारा समान रूप से सराही गई मटिल्डा एक मनोरंजक कहानी है जो पाठकों को असाधारण शक्तियों वाली और अत्यंत बुद्धिमान एक सरल बच्ची की अंतरंग दुनिया की आनंददायक यात्रा पर ले जाएगी।

About the Author(s)

रोल्ड डाल का जन्म 13 सितंबर, 1916 में हुआ था। वे सुप्रसिद्ध ब्रिटिश उपन्यासकार थे। वे मूलतः नॉर्वे के निवासी थे। उनकी किताबों की दुनियाभर में 25 करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। डाल को 20वीं शताब्दी के सबसे महान कहानीकारों में गिना जाता है। डाल का जन्म वेल्स के एक संपन्न नॉर्वेजियाई परिवार में हुआ था, और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन इंग्लैंड में बिताया। उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान रॉयल एयर फ़ोर्स में सेवाएँ दीं। वे लड़ाकू विमान पायलट और फिर एक जासूस बने। साहित्य में बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें 1983 में वर्ल्ड फैंटेसी अवॉर्ड फ़ॉर लाइफ़टाइम अचीवमेंट और ब्रिटिश बुक अवॉर्ड्स शामिल हैं।
रोल्ड डाल ने अपनी जीवनी लिखने वाले लेखक डॉनल्ड स्टुरक से कहा था, “बच्चों के नज़रिए से दुनिया को देखना मुझे बहुत आसान लगता है और शायद यही कारण है कि मैं बच्चों के लिए सफलतापूर्वक कहानियाँ लिख पा रहा हूँ।”
डाल को ग्रामोफ़ोन और सीडी सुनना पसंद था। अपने 6 फुट 5 इंच लंबे क़द और रीढ़ की हड्डी के अनेक ऑपरेशनों के कारण वे देर तक बैठने में असहज महसूस करते थे।
अगर डाल की वंशावली के बारे में बात करें, तो हमारे सामने बड़े रोचक तथ्य उभर कर आएँगे। 1822 में नॉर्वेजियाई गाँव ग्रू के एक गिरजाघर में अचानक आग लग गई। सौ से अधिक लोग इस दुर्घटना का शिकार हो गए, स़िर्फ कुछ ही इस दर्दनाक अंत से बच पाए, जिनमें शामिल थे गिरजाघर के पादरी आइवर हेसलबर्ग। उनकी पत्नी नॉर्वेजियाई नौसेना वीर पीटर वेसेल की वंशज थीं। उनके पोते कार्ल लौरित्स ने एलिन वॉलेस से शादी की थी, जो स्कॉटिश सामंत एवं विद्रोही विलियम वॉलेस की वंशज थीं, जिनकी बेटी सोफ़िया मैग्डलेन के बेटे थे रोल्ड डाल।
उनकी रचित कहानियों पर उनके स्वयं के अनुभवों का गहरा प्रभाव पड़ा। पिता की मृत्यु के समय वे केवल तीन साल के थे। उन्होंने स्वयं सेंट पीटर और रेप्टन बोर्डिंग स्कूलों में कई बार मार खाई, शायद इन कटु अनुभवों और स्मृतियों ने उन्हें प्रेरित किया कि वे मिस ट्रंचबुल जैसे पात्रों का सृजन करें।
जुलाई 1934 में, डाल ने शेल पेट्रोलियम कंपनी में काम करना शुरू किया। यूनाइटेड किंगडम में दो साल के प्रशिक्षण के बाद, उन्हें पहले मोम्बासा, केन्या, फिर तांगानिका और दार अस सलाम (अब तंजानिया का हिस्सा) के ब्रिटिश उपनिवेश में भेजा गया।
अमेरिका में वे प्रसिद्ध ब्रिटिश उपन्यासकार सीएस फ़ॉरेस्टर से मिले। फ़ॉरेस्टर, डाल के सेना के अनुभवों पर आधारित कहानी लिखने के लिए तत्पर थे; फ़ॉरेस्टर ने डाल से आरएएफ़ के कुछ क़िस्सों को लिखने के लिए कहा, ताकि वे उन्हें एक कहानी का रूप दे सकें। फ़ॉरेस्टर ने डाल के लेख को ठीक उसी तरह प्रकाशित करने का निर्णय किया, जैसा कि डाल ने उसे लिखा था। डाल ने अमेरिकी अभिनेत्री पेट्रीसिया नील (जिन्होंने द फ़ाउंटेन हेड जैसी सफल फ़िल्मों में अभिनय किया था) से शादी की। उनकी शादी 30 साल चली और उनके पाँच बच्चे हुए। 1983 में डाल ने फेलिसिटी ड’ अब्रू क्रॉसलैंड से शादी कर ली। डाल को जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। न्यू यॉर्क शहर में एक टैक्सी चालक ने डाल के बेटे थीओ डाल की बच्चा गाड़ी को टक्कर मार दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके दिमाग़ में कुछ अंदरूनी चोटें आ गईं। इसलिए रोल्ड डाल ने ‘वेड- डाल-टिल वॉल्व’ (या डब्लूडीटी) का विकास किया। इसके अविष्कार से उनके बेटे की स्थिति में कुछ सुधार हो सका। ‘वेड- डाल-टिल वॉल्व’ के प्रयोग से लगभग 3000 बच्चों को इस गंभीर स्थिति में मदद मिली है।
डाल की मृत्यु 1990 में कैंसर से हुई।
उनकी कुछ अन्य प्रसिद्ध रचनाओं में ‘चार्ली ऐंड द चॉकलेट फैक्ट्री’, ‘बीएफ़जी’ इत्यादि हैं, जिन पर सफल फ़िल्में भी बनी हैं। 2016 में रोल डाल के जन्मदिन की सौवीं वर्षगाँठ के उपलक्ष में ऑक्सफ़ोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी ने उनके प्रयोग किए गए/उनके द्वारा रचित 6 शब्दों को अपनी सूची में जोड़ने का निर्णय लिया। ये 6 शब्द थे-
Scrumdiddlyumptious
Witching hour
Human bean
Oompa Loompa
Dahlesque
Golden ticket

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