Nardurg: Durg Samrajya Ke Etihasik Rahasya ( Hindi)

Nardurg: Durg Samrajya Ke Etihasik Rahasya ( Hindi)

Author : Chandrabhan 'Rahi'

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Rs. 699.00
Classification Fiction Stories
Pub Date 25th September 2023
Imprint Sarvatra (An Imprint of Manjul Publishing House)
Page Extent 510
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355433350
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(inclusive all taxes)
About the Book

“अपमान का घाव वह घाव है, जिसके लगने से प्राण नहीं निकलते परन्तु शरीर प्राणहीन हो जाता है।”

नरदुर्ग ऐसे ही अपमानित राजा की कथा है जिसमें अपमान का प्रतिशोध अत्यधिक बढ़ जाने से पूरे दुर्ग को नष्ट हो जाना पड़ता है। दास जीवन नरकीय जीवन है। इससे उबरने के लिये किए गए संघर्ष की कथा है नरदुर्ग।
उपन्यासों की श्रंखला में यह उपकोटे बनाए जाते थे। दुर्ग के चारों ओर गहरी खाई खोद कर उसमें पानी भरकर, घड़ियाल, मगरमच्छ एवं अन्य विषैले जानवरों को छोड़ा जाता था। दीवारों पर हमेशा चौकसी रखी जाती थी।
यह ऐसे ही दुर्ग की कथा है, जो अपने वचनों के पालन में मित्र दुर्ग, जलदुर्ग के खोए हुए अस्तित्व को गिरीदुर्ग से वापस दिलाने के लिये स्वयं के दुर्ग का भविष्य ख़तरे में डाल देता है। मित्रता की अनूठी उपमा का पाठकों के सम्मुख विस्तार पूर्वक चित्रण करते हुए दुर्गों की रहस्यमयी कथाओं को उजागर किया गया है।
चन्द्रभान ‘राही’ किस्सागोई की कला में माहिर हैं। यह पुस्तक पढ़ते हुए ऐसा लगता है कि कोई किस्सा सुनाता जा रहा है और बात में से बात निकलती जा रही है। कथा कहते हुए वे इतने विस्तार में चले जाते हैं कि पाठक चमत्कृत हो जाता है। वे पात्रों का चरित्र चित्रण, उनकी भेष-भूषा, उनके संवाद के माध्यम से कथा को उसी काल विशेष में ले जा कर छोड़ते हैं।

About the Author(s)

मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य अकादमी, भोपाल से सम्मान प्राप्त चन्द्रभान ‘राही’ का जन्म उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुआ। भोपाल में एम.ए. हिन्दी साहित्य एवं एलएल.एम. प्राप्त कर साहित्य के क्षेत्र में तेरह कहानी संग्रह, छह उपन्यास एवं विविध विषयों पर कई पुस्तकों का लेखन किया है। वर्तमान में भोपाल में निवासरत।
Email : rahi_chandrabhan@rediffmail.com

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