Parishah Jayi  ( Hindi)

Parishah Jayi ( Hindi)

Author : Arvind Jain

In stock
Rs. 199.00
Classification
Pub Date December 2021
Imprint Manjul Publishing House
Page Extent 128
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355430465
In stock
Rs. 199.00
(inclusive all taxes)
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About the Book

लेखक ने इस पुस्तक में बाईस परीषहों का वर्णन किया है, और वे मूलतः वरिष्ठ आयुर्वेद परामर्शदाता और चिकित्सक हैं। उन्हें चिकित्सकीय क्षेत्र में और ‘शाकाहार अहिंसा जीव दया’ पर कार्य करते हुए लगभग पचास वर्ष हो गए हैं। पूर्व में कई मुनियों, आर्यिकाओं व ब्रह्मचारी बहिन-भाइयों की चिकित्सा करने का सुअवसर मिला, लेकिन पदोन्नति के कारण अनवरत स्थानान्तरण होने से धीरे-धीरे संपर्क कम हो गया। चिकित्सा के दौरान मुनियों का परिषह यानी कष्ट सहकर स्वविवेक से अंगीकार निराकुल भावों से, समत्व भाव से मोक्ष मार्ग पर चलते रहना बड़ा अविश्वस्नीय लगता था। कुछ अध्ययन करने के बाद यह अहसास हुआ की मुनि धर्म का पालन करना ‘असिधारा’ है। वहीं क्षत्रिय धर्म में समझौते की कोई गुंजाईश नहीं है।
बाह्य आवरण दिगम्बर होने से सामाजिक व्यवस्था के अनुकूल न होने के कारण कभी-कभी अप्रिय स्थिति भी निर्मित होती है, पर गहराई से मनन-चिंतन करने के उपरांत भ्राँतियाँ निर्मूल हो जाती हैं।
पुस्तक पठनीय, ज्ञानवर्धक और अनुकरणीय प्रतीत होगी, ऐसी पाठकों से अपेक्षा है।

About the Author(s)

डॉ. अरविन्द जैन एक आयुर्वेद परामर्शदाता चिकित्सक, लेखक व चिंतक होने के साथ-साथ अहिंसा शाकाहार जीवदया के क्षेत्र में वर्ष 1985 से कार्यरत हैं। वे विगत 30 वर्षों से लोगों को नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श दे रहे हैं। आप मध्यप्रदेश शासन में 37 वर्षों से अधिक की लम्बी सेवाएँ देते हुए अनेक महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुए। सेवा काल के दौरान पूरे प्रान्त का दौरा किया और दीर्घकालीन अनुभव के आधार पर व्यवहारिक धरातल पर निकटता से सीखने और समझने का अवसर मिला, जिसका प्रमाण उनके उपन्यास और आत्मकथा आनंद कही अनकही में पढ़ने को मिलता है। वर्तमान में तनाव और मानसिक, आर्थिक, सामाजिक, व्यवहारिक और व्यक्तिगत परेशानियों से कैसे जूझें यह इस पुस्तक में बहुत बारीकी से समझा जा सकता है।
आनंद कही अनकही, चार इमली, चौपाल, चतुर्भुज, चेतना का चातक, सुहाना सफ़र और पचास अन्य कहानियाँ, नामक आत्मकथा, संकलन, कहानियाँ और उपन्यास प्रकाशित हुए हैं और अनेक संस्थाओं से सम्मानित हुए हैं।
ईमेल : drarvindkumarjain1951@gmail.com

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