Prem Moksh: Prem Se Moksh Ki Awadharna ( Hindi)

Prem Moksh: Prem Se Moksh Ki Awadharna ( Hindi)

Author : Chandrabhan 'Rahi'

In stock
Rs. 450.00
Classification Fiction
Pub Date Feb 2023
Imprint Sarvatrat
Page Extent 314
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355432506
In stock
Rs. 450.00
(inclusive all taxes)
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About the Book

“देह का समर्पण प्रेम नहीं है, देह का त्याग मोक्ष नहीं है।”
“प्रेम नाम परमात्मा का और स्वयं को पहचान लेना ही मोक्ष है।”

“एक ओर प्रज्वलित अग्नि को रखें तथा दूसरी ओर स्त्री को रखा जाए, तब स्त्री अकेले भार मुक्त रहेगी। अग्नि की लौ को काष्ठ शांत नहीं कर सकती, समुद्र की तृष्णा को नदियाँ तृप्त नहीं कर सकती।” पं. शम्भूनाथ जी महाराज ने स्त्री प्रेम की इच्छापूर्ति को प्रकट करते हुए कहा था।

प्रेम प्राप्ति के लिए रति के द्वारा किए जा रहे अथक प्रयास के असफल होने के परिणामस्वरूप शिव का जीवन छिन्न-भिन्न होने से सत्य मार्ग की ओर शिव को जाने से रति रोकने में असमर्थ है।

“कुछ क्षण मुझे यहीं रहने दो, शिव के देह की गंध अभी शेष है।”

जो प्रेम, वासना पर आकर समाप्त हो जाए वह मात्र दैहिक आकर्षण के अतिरिक्त कुछ नहीं है। मानव, प्रेम की अवधारणा को ग्रहण करते-करते कब मोक्ष की अवधारणा को प्राप्त हो जाता है, यह पुस्तक इस रहस्य को प्रकट करती है।

श्रेष्ठ के लिए श्रेष्ठतम को त्याग देना मानव की प्रकृति है। उचित व अनुचित में भिन्नता की पहचान न कर पाना ही पतन का मुख्य कारण है। भारतीय पुराणों पर आधारित प्रेम और मोक्ष को परिभाषित करने का यत्न करती पुस्तक प्रेम मोक्ष।

About the Author(s)

कई बेस्टसेलिंग पुस्तकों के लेखक चन्द्रभान ‘राही’ 1969 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जन्में। सफल लेखन तक का लम्बा सफर तय किया है। अभी तक आठ उपन्यास, पन्द्रह कहानी संग्रह एवं अन्य विषयों पर कई पुस्तकों का लेखन किया है।
राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कार प्राप्त। राही अपनी पीढ़ी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले लेखक हैं। श्रेष्ठतम उपन्यास लेखन में अग्रणी नाम हैं।
rahi_chandrabhan@rediffmail.com

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