The Courage To Be Happy ( Hindi)

The Courage To Be Happy ( Hindi)

Author : Ichiro Kishimi And Fumitake Koga (Author) Neelam Bhatt (Translator)

In stock
Rs. 450.00
Classification Self-Help
Pub Date 25th November 2023
Imprint Manjul Publishing House
Page Extent 256
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789355436504
In stock
Rs. 450.00
(inclusive all taxes)
OR
About the Book

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेस्टसेलिंग रही द करेज टु बी डिस्लाइक्ड के सीक्वल के रूप में लिखी गई यह पुस्तक हमें जीवन कैसे जीना चाहिए, इस पर गहराई से विचार करती है। इसकी लाखों प्रतियाँ जापान में बिक चुकी हैं।

द करेज टु बी डिस्लाइक्ड की तरह इस किताब में भी सुकरात व उनके शिष्यों के बीच चलने वाले संवाद की तर्ज़ पर एक दार्शनिक व एक युवक के बीच संवाद होता है। दार्शनिक का मानना है कि अल़्फ्रेड ऐडलर के सिद्धांत हमें ख़ुशी और संतुष्टि भरे जीवन को जीने का तरीक़ा बताते हैं। ऐडलर उन्नीसवीं सदी में मनोविज्ञान की एक बड़ी हस्ती थे, जिन्हें भुला दिया गया और लम्बे समय तक जिन्हें अपने समकालीन फ़्रायड और युग की तुलना में कम महत्त्वपूर्ण समझा गया। नौजवान को इस बात को लेकर संशय है कि केवल अपनी सोच को बदलकर जीवन को क्या सचमुच बेहतर बनाया जा सकता है। दार्शनिक उस नौजवान को बहुत धैर्य के साथ ऐडलर के ‘साहस के मनोविज्ञान’ का सार समझाता है और उसे पाने के लिए किए जाने वाले आवश्यक मानसिक उपायों के बारे में बताते हुए स्पष्ट करता है कि किस तरह उससे हमारे जीवन जीने के तरी़के में बदलाव आ सकते हैं।
यह किताब वाकई ज़िंदगी को बदलने की ताक़त रखती है और इसे सार्वभौमिक रूप से लागू किया जा सकता है।

About the Author(s)

इचिरो किशिमि का जन्म 1956 में क्योटो में हुआ था और वह वतर्मान में वहीं निवासरत हैं। अपने हाई स्कूल के दिनों से ही वह दार्शनिक बनने की आकांक्षा रखते थे। 1989 से वह ऐडलर के मनोविज्ञान पर शोध और उन पर लेखन तथा व्याख्यान देते रहे हैं। वह जैपनीज़ सोसाइटी ऑफ़ ऐडलेरियन सायकोलॉजी के प्रमाणित परामर्शदाता एवं सलाहकार के तौर पर मनोवैज्ञानिक क्लीनिकों में युवाओं को सलाह देने का काम भी करते रहे हैं। उन्होंने अल़्फ्रेड ऐडलर की चुनिंदा रचनाओं का जापानी भाषा में अनुवाद किया है और कई अन्य पुस्तकों के अलावा उन्होंने अडोरा शिनरिगाकु न्युमॉन (ऐडलेरियन मनोविज्ञान का परिचय) भी लिखी है।

फ़ुमिटाके कोगा का जन्म 1973 में हुआ। वह पेशेवर लेखक हैं और अपनी रचनाओं के लिए पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने व्यापार से सम्बन्धित पुस्तकें और कथेतर साहित्य लिखा है। अपनी उम्र के दूसरे दशक के उत्तरार्ध में उन्होंने ऐडलेरियन मनोविज्ञान पढ़ा और पारम्परिक समझ को चुनौती देने वाले उसके स्वरूप से वह बहुत प्रभावित हुए। यही कारण है कि वह कई बार इचिरो किशिमि से मिलने क्योटो गए और उनसे ऐडलेरियन मनोविज्ञान के सार को समझकर उन्होंने ‘संवाद प्रारूप’ के लिए नोट्स लिए। ग्रीक दर्शन के इस तरीके का इस किताब में प्रयोग किया गया है।

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