Vivekanand: Aadhunik Yug ka Bhooma Purush ( Hindi)

Vivekanand: Aadhunik Yug ka Bhooma Purush ( Hindi)

Author : Dr. Suresh Chandra Sharma

In stock
Rs. 199.00
Classification Non-Fiction
Pub Date May 2019
Imprint Sarvatra (An Imprint of Manjul Publishing House)
Page Extent 146
Binding Paperback
Language Hindi
ISBN 9789388241755
In stock
Rs. 199.00
(inclusive all taxes)
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About the Book

विवेकानंद आधुनिक युग के भूमा पुरुष

अल्प से तात्पर्य है जागतिक ज्ञान तथा भूमा का अर्थ है आध्यात्मिक ज्ञान। इस दृष्टि से स्वामी विवेकानंद 'भूमानन्द' से परिपूर्ण पुरुष थे तथा अल्प (तृष्णा) में आबद्ध मानवजाति को भूमा सुख की ओर ले जाने वाले पुरुष थे।
स्वामी विवेकानंद जैसे भूमा पुरुष ने देखा कि विचार-पद्धति और जीवन पद्धति में विश्व दो भागों में बँटा हुआ है - एक पूर्वी और दूसरी पश्चिमी। अपनी 'प्राच्य और पाश्चात्य' नामक कृति में विश्लेषण करते हुए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यद्यपि दोनों का लक्ष्य एक ही है - जीवन का सौन्दर्यीकरण, परन्तु दोनों की प्राथमिकतायें भिन्न हैं। प्राच्य संस्कृति जीवन को भीतर से सुन्दर बनाने पर बल देती है जबकि पाश्चात्य संस्कृति जीवन को बाहर से ग्रहण करती है। वस्तुतः जीवन में बाहर और भीतर जैसा विभाजन नहीं है तथापि जन सामान्य ने उसे भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में विभाजित कर दिया है। इस कृत्रिम विभाजन को मिटाने हेतु स्वामीजी ने भारत के अद्वैत - दर्शन का प्रयोग किया तथा वैज्ञानिक कसौटी पर उसे खरा सिद्ध कर दिया।
अपनी कार्यपद्धति में उन्होंने 'मनुष्य निर्माण' का कार्य चुना तथा उनकी प्रतिक्रिया थी - समष्टि की पृष्टभूमि में व्यष्टि का निर्माण। प्रसिद्द फ्रेंच लेखक रोमा रोलाँ ने लिखा है, 'स्वामी विवेकानंद की सृजनात्मक प्रतिभा को दो शब्दों में रखा जा सकता है - संतुलन और समन्वय। पुस्तक की सम्पूर्ण सामग्री इन आदर्शों पर ही केंद्रित है।

About the Author(s)

सुरेशचन्द्र शर्मा का जन्म 1 नवंबर 1944 को ग्राम ग़ुलालई, सबलगढ़, ज़िला मुरैना (मध्य प्रदेश) में हुआ I वे जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर से वर्ष 2006 में प्रमुख वैज्ञानिक और मृदा विज्ञान विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए I छात्र जीवन से ही छात्र-कल्याण, सामाजिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में अनवरत सक्रिय कार्य करते रहे हैं I वैज्ञानिक शोधकार्य एवं अध्यापन के साथ सांस्कृतिक व आध्यात्मिक अध्ययन-अध्यापन करते हुए रामकृष्ण मिशन (बेलूर), विवेकानन्द केंद्र (कन्याकुमारी), श्री सारदा संघ (कोलकाता) तथा श्री अरविन्द सोसायटी (पुदुच्चेरी) से घनिष्ट रूप से जुड़े रहे हैं I रामकृष्ण-विवेकानन्द-भावधारा, श्री अरविन्द साहित्य, पाण्डुरंग आठवाले स्वाध्याय आन्दोलन तथा गीताप्रेस (गोरखपुर) के साहित्य का स्वान्तः सुखाय, व्यक्तित्व विकासार्थ एवम संस्कृति संवर्धनाय अनुवाद, लेखन, संपादन तथा संकलन किया है I

वर्तमान में रामकृष्ण (ग्वालियर) के समन्वयक तथा श्री अरविन्द सोसायटी - इंस्टिट्यूट ऑफ़ कल्चर (ग्वालियर) के प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में अनेक सृजनात्मक कार्यों में व्यस्त हैं I

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